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"मजबूरियाँ"

हर एक मुकाम पर नाकामियाँ नजर आयीं,
जलाये दिये जहाँ भी आंधियाँ नजर आयीं...

कदमों ने आगे बढने का जो हौंसला भी किया,
तो सामने राह में मेरे मजबूरियाँ नजर आयीं...

कही है जिसनें भी सच बात इस जमानें में,
उसके पाँव में ही बंदिशें नजर आयीं...

मेरे ख्याल से ये आजमाइश है मेरी,
जो बनाया आशियां तो बिजलियाँ नजर आयीं...

उठाकर जब भी देखा आइना मैंने,
तो खुद में ही खामियाँ नजर आयीं...

❤कन्या❤

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